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हीमोराइड्स - पहचान, उपचार, रोकथाम

DocFinder, Shutterstock
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लगभग हर कोई अपने जीवन के किसी न किसी पड़ाव पर बवासीर या हीमोराइड्स (हीमोराइड्स बीमारी) से पीड़ित होता है। बहुत से लोग गुदा क्षेत्र में दर्द के बारे में शर्मिंदगी महसूस करते हैं और अपने डॉक्सर से मदद मांगने से कतराते हैं। हीमोराइड्स आखिर क्या है, आप हीमोराइड्स की रोकथाम कैसे कर सकते हैं, और अगर आपको हीमोराइड्स से जुड़े संकेत दिखते हैं तो आपको क्या करना चाहिए, यह सब जानने के लिए पढ़ना जारी रखें।

हमारा पाचन तंत्र

हमारा पाचन तंत्र और आँतें अलग-अलग हिस्सों से मिलकर बनते हैं, जिनमें से प्रत्येक (आमाशय - छोटी आँत - बड़ी आँत - मलाशय - गुदा) हमारे द्वारा खाए जाने वाले भोजन को तोड़ने में अलग-अलग काम पूरा करता है। मलाशय हमारे पाचन तंत्र के निचले हिस्से में स्थित होता है। अपाचनीय भोजन गुदा से बाहर निकलने से पहले मलाशय की नली में रहता है। गुदा में दो महत्त्वपूर्ण घेरेदार मांसपेशियाँ होती हैं जो अपशिष्ट की निकासी को नियंत्रित करती हैं। इन घेरेदार मांसपेशियों के कार्यों में हीमोराइड्स ऊतक सहायता करते हैं। हीमोराइड्स ऊतक रक्त वाहिकाओं से निर्मित एक गद्देदार संरचना होती है जो मलाशय और गुदा के मध्य स्थित होता है, और जो इसे बंद भी करता है। चिकित्सकीय शब्दावली में इस ऊतक का नाम हीमोराइड्ल प्लेक्सस होता है. जिसे आम तौर पर “हीमोराइड्स” कहा जाता है। इसका मतलब है कि हीमोराइड्स सभी को होता है। चिकित्सकीय रूप से, यह बीमारी, जिसे “हीमोराइड्स” या “हीमोराइड्स की बीमारी” भी कहते हैं, तब होती है जब यह हीमोराइड्ल ऊतक फैल कर नीचे की तरफ खिसक जाता है।

लक्षण - हीमोराइड्स की पहचान करना

हीमोराइड्स तब होता है जब गुदा की घेरेदार मांसपेशियों और हीमोराइड्ल ऊतक के मध्य की अंतःक्रिया बाधित होती है, या जब रक्त वाहिकाओं से निर्मित गद्देदार संरचना समुचित रूप से गीली होना बंद हो जाती है और आकार में बढ़ जाती है। हीमोराइड्स से ग्रस्त मरीजों में मुख्य रूप से निम्नलिखित लक्षण प्रकट होते हैं: गुदा से खून बहना गुदा में खुजली गुदा में दबाव महसूस होना गुदा में जलन * गुदा में दर्द गुदा से बहने वाले खून का तात्पर्य मुख्यतः ताजे, चमकीले लाल खून से होता है, जो ज़्यादातर मरीजों को अपने मल या अपने टॉयलेट पेपर में दिखता है। अपने मल में खून देखकर ज़्यादातर लोग डर जाते हैं। गुदा से खून बहने की जाँच एक डॉक्टर द्वारा की जानी चाहिए, लेकिन यह पहले से भयभीत होने का कारण नहीं है। जिन मरीजों में हीमोराइड्स बीमारी शुरूआती चरण में होती है, उन्हें आम तौर पर गुदा क्षेत्र में सामान्य असहजता महसूस होने लगती है। यह क्षेत्र सामान्य से अधिक संवेदनशील हो जाता है और जरा सी बाहरी जलन पर प्रतिक्रिया करने लगता है।

हीमोराइड्स की चार अवस्थाएँ

चिकित्सा विज्ञान में, हीमोराइड्स बीमारी को चार अवस्थाओं में बाँटा गया है: अवस्था 1: इस अवस्था में, हीमोराइड्ल ऊतक की सूजन गुदा के अंदरुनी हिस्से में सीमित रहती है। मल में या टॉयलेट पेपर पर चमकीला लाल खून नज़र आना शुरूआती संकेतों में से एक होता है। खुजली भी हो सकती है। चूँकि इस समय तक अक्सर ज़्यादा दर्द नहीं होता, इन हीमोराइड्स के बारे में आम तौर पर संयोगवश, दूसरी जाँचों के दौरान पता चलता है। अवस्था 2: हीमोराइड्स बीमारी की दूसरी अवस्था में, हीमोराइड्ल ऊतक और भी बड़ा हो जाता है। इस बिंदु पर, हीमोराइड्स में जलन हो सकती है, परेशानी भरी खुजली हो सकती है, और रिस सकता है। मलोत्सर्ग के दौरान, रक्त वाहिका ग्रंथिकाएँ गुदा से बाह्र निकल जाती हैं और मलोत्सर्ग के बाद अपने आप अंदर खींच ली जाती हैं। अवस्था 3: इस अवस्था में, मलोत्सर्ग के बाद छोटी रक्त वाहिका ग्रंथिकाओं को पुनः गुदा के भीतर करने के लिए उंगलियों का प्रयोग करना पड़ता है। तीसरी अवस्था की विशेषता भारी खुजली, जलन, और रिसना, तथा गुदा से खून बहना बढ़ना होती हैं। अवस्था 4: इस अवस्था में हीमोराइड्ल ऊतक इतना विशाल हो जाता है कि यह भीतरी गुदा क्षेत्र से बाहर आ जाता है। मलोत्सर्ग के बाद रक्त वाहिकाएँ अपने आप भीतर नहीं जातीं, और इन्हें उंगली की सहायता से पुनः भीतर नहीं किया जा सकता। हीमोराइड्स रिसने लगते हईं और मरीज को असहजतापूर्ण खुजली, एक तीखी जलन, और गुदा क्षेत्र में आम तौर पर संवेदनशीलता का अहसास होने लगता है। मलोत्सर्ग के बाद बहने वाले खून की मात्रा भी बढ़ जाती है।

हीमोराइड्स का सही ढंग से उपचार

हीमोराइड्स की बीमारी का उपचार है और आम तौर पर इसका असरदार ढंग से उपचार किया जा सकता है। जितनी जल्दी समुचित उपचार शुरू होता है, हीमोराइड्स बीमारी को उतनी तेजी और आसानी से ठीक किया जा सकता है। मरीज का चिकित्सकीय इतिहास लेते समय, डॉक्टर पहले मौजूदा लक्षणों के बारे में पूछेगा। इसके बाद, दो अलग-अलग जाँचों (डिजिटल जाँच और एनल एंडोस्कोपी) से तय किया जा सकता है कि क्या हीमोराइड्स बीमारी मौजूद है, और अगर हाँ, तो यह कितनी प्रगति कर चुकी है। एक डिजिटल जाँच में, गुदा क्षेत्र की उंगलियों से जाँच की जाती है, जबकि एनल एंडोस्कोपी में एक विशेष उपकरण गुदा क्षेत्र में प्रवेश कराकर संभावित परिवर्तनों को देखा जाता है। गुणों, प्रगति, और मरीज के निजी चिकित्सकीय इतिहास के आधार पर, डॉक्टर आवश्यक उपचार शुरू कर सकता है।

अवस्था 1 का उपचार

इस अवस्था में, खुजली का उपचार एक विशेष हीमोराइड्स लेप से किया जा सकता है। प्राकृतिक पदार्थों से बने नए हीमोराइड्स लेप गुदा क्षेत्र की श्लेष्मा झिल्ली को आराम पहुँचाते हैं, एंटीस्पाज़्मोडिक होते हैं, और जलन को कम करते हैं। हीमोराइड्ल ऊतक की हल्की-फुल्की सूजन को सपोजिटरी और क्रीम के माध्यम से ठीक किया जा सकता है। आउटपेशेंट इंजेक्शन (स्क्लेरोथेरेपी- sclerotherapy) एक अन्य विकल्प है। इस प्रक्रिया में डॉक्टर हीमोराइड्स में इंजेक्शन से एक विशेष पदार्थ प्रविष्ट कराता है, जिससे वे सिकुड़कर अपने सामान्य आकार में पहुँच जाते हैं। स्क्लेरोथेरेपी (sclerotherapy) दर्दरहित होती है और इसमें केवल कुछ मिनट लगते हैं।

अवस्था 2 का उपचार

इस अवस्था में भी, हीमोराइड्स को नियंत्रित करने के लिए इंजेक्शन का इस्तेमाल किया जा सकता है। रबर बैंड लिगेशन (ligation) एक अन्य उपचार विकल्प है। इस प्रक्रिया में छोटे रबर बैंड हीमोराइड्ल ऊतक के हिस्से में बांधा जाता है, जो फिर अलग हो जाता है और रबर बैंड के साथ प्राकृतिक रूप से बाहर निकाल दिया जाता है। यह एक आउटपेशेंट प्रक्रिया होती है जिसे डॉक्टर द्वारा किया जा सकता है।

अवस्था 3 का उपचार

तीसरी अवस्था में, हीमोराइड्स का उपचार रबर बैंड लिगेशन के साथ या HAL-RAR नामक विधि का इस्तेमाल करके किया जा सकता है। हीमोराइड्स का उपचार सर्जरी के माध्यम से भी किया जा सकता है। HAL-RAR विधि एक प्रक्रिया होती है जो रक्त वाहिकाओं को सिकोड़ती है और गुदा के आस-पास के गुदा ऊतक को दोबारा इसकी जगह पर ले जाती है। यह उपचार दर्दरहित होता है और मरीज आम तौर पर अगले दिन अस्पताल से छुट्टी ले सकता है।

अवस्था 4 का उपचार

चौथी अवस्था में, हीमोराइड्स का उपचार करने के लिए आम तौर पर सर्जरी की आवश्यकता होती है। मरीज के लक्षणों और दर्द पर निर्भर करते हुए, उसे आम तौर पर उपचार के चार दिनों के भीतर छुट्टी दी जा सकती है। हीमोराइड्स बीमारी की विशेषताओं और गंभीरता के आधार पर, सर्जरी के कुछ विकल्प उपलब्ध हैं, जो इन लक्षणों से दीर्घकालिक छुटकारा दिला सकते हैं। मूल रूप से, प्रत्येक ऑपरेशन में सामान्य एनेस्थीसिया (anesthesia) देकर बाहर लटकी रक्त वाहिकाओं को काट कर अलग किया जाता है। चीरे लगाने की विधि और उत्पन्न होने वाले घाव को टांका लगाने या खुला छोड़ने के आधार पर प्रक्रियाएँ भिन्न-भिन्न होती हैं। हीमोराइड्स बीमारी के बारे में किसी को भी शर्मिंदगी महसूस नहीं करनी चाहिए। यह बहुत आम चिकित्सकीय समस्या है, जिसकी पहचान की जानी चाहिए और, यदि आवश्यक हो, एक डॉक्टर द्वारा इलाज किया जाना चाहिए।

हीमोराइड्स के कारण

हीमोराइड्स के कई संभावित कारण होते हैं। निम्नलिखित कारक गुदा के आसपास दर्द के सबसे आम कारणों में से हैं: कम फ़ाइबर वाला आहार: एक असंतुलित आहार या कम फ़ाइबर वाले आहार के परिणामस्वरूप कब्ज और मल में कड़ापन हो सकता है। लंबे समय तक कड़े अपशिष्ट को उत्सर्जित करने से हीमोराइड्ल ऊतक में जलन पैदा हो सकती है। बहुत कम मल: बहुत कम मल से मलाशय की नली उचित ढंग से नहीं भरती, जिसकी वजह से आंत की दीवार पर्याप्त ढंग से फैल नहीं पाती। इसकी वजह से मलोत्सर्ग के दौरान बहुत अधिक ज़ोर लगाना पड़ता है। बहुत अधिक ज़ोर लगाना: मलोत्सर्ग के दौरान बहुत अधिक ज़ोर लगाने से आंत की रक्त वाहिकाओं में दबाव बढ़ जाता है। इसकी वजह से रक्त का संकुलन होता है, जिसके परिणामस्वरूप हीमोराइड्ल ऊतक ग्रंथिकाएँ बनाता है और आगे की तरफ उभर आता है। व्यायाम की कमी, बहुत लंबे समय तक बैठने, या अधिक वजन की वजह से हीमोराइड्ल ऊतक में रक्त वाहिकाओं पर दबाव बढ़ना। अनुवांशिकीय प्रवृत्ति कमज़ोर संयोजक ऊतक (अधिक उम्र के कारण या जन्मजात) लंबे समय तक लैक्सेटिव (रेचक) का इस्तेमाल गर्भावस्था: गर्भावस्था से उदर में दबाव बढ़ता है, जिससे खून अवरुद्ध हो सकता है जो हीमोराइड्स ऊतक से बाहर निकल जाता है। गर्भावस्था के दौरान हार्मोनों में होने वाले बदलाव भी हीमोराइड्स बीमारी का एक कारण हो सकते हैं।

हीमोराइड्स की रोकथाम कैसे करें

जितने ज़्यादा लंबे समय तक हीमोराइड्स की पहचान नहीं की जाती, उपचार उतना ही कठिन और अप्रिय हो जाता है। यही वजह है कि जैसे ही आपको हीमोराइड्स बीमारी के शुरूआती संकेत दिखें, आपको चिकित्सक से परामर्श करना चाहिए। यदि शुरूआती लक्षणों का उचित ढंग से उपचार किया जाता है; तो ज़्यादातर मरीज कष्टदायक ऑपरेशन से बच सकते हैं। हालाँकि, हीमोराइड्स की रोकथाम के लिए हर व्यक्ति लक्षित कदम उठा सकता है, और यहाँ तक कि अनुवांशिकीय प्रवृत्ति वाले लोग भी गुदा के आसपास (आवर्ती) परेशानीजनक असहजता से बचने के लिए एहतियात बरत सकते हैं।

एक स्वस्थ जीवनशैली पाचन और मलत्याग में सहायक होती है

एक स्वस्थ जीवनशैली के न केवल स्वास्थ्य पर दीर्घकालिक सकारात्मक प्रभाव होते हैं, यह सामान्य और स्वस्थ पाचन और मलत्याग में भी सहायक होती है। फ़ाइबर की उच्च मात्रा वाला आहार मल का घनापन सही बनाए रखता है, और इस तरह मलत्याग के दौरान होने वाली समस्याओं की रोकथाम करता है। फ़ाइबर ढेर सारा पानी अवशोषित करता है, और फिर फूल जाता है। इससे आंत की गतिविधि और मल उत्पादन के लिए एक सकारात्मक उद्दीपन उत्पन्न होता है। फ़ाइबर-समृद्ध भोजनों में फल, सब्जियाँ, गेहूँ के उत्पाद (गेहूँ की ब्रेड, गेहूँ की दलिया, जई की दलिया, गेहूँ के नूडल), दलहन (बीन, दालें), बादाम-अखरोट, सीरियल फ़्लेक (रोल्ड ओट, स्पेल्ट), बिना पॉलिश का चावल, और अन्य बहुत कुछ शामिल हैं। शरीर को पर्याप्त मात्रा में फ़ाइबर देने के लिए, हर दिन औसतन बस 30 ग्राम फ़ाइबर पर्याप्त है।

एक अन्य रोकथाम उपाय है पर्याप्त पानी पीना। पर्याप्त तरल पदार्थों, विशेषकर पानी और बिना चीनी की चाय को पीने से शरीर को सामान्य मुलायम मल उत्पन्न करने में सहायता मिलती है।

गतिशील रहना भी एक स्वस्थ जीवन शैली का अत्यंत महत्त्वपूर्ण हिस्सा है। हालाँकि, जिन लोगों में हीमोराइड्स बीमारी पहले ही विकसित हो चुकी है, उन्हें ऐसे खेलों से परहेज करना चाहिए जिनमें पेल्विक फ़्लोर पर दबाव पड़ता हो (जैसे, टेनिस, ऐरोबिक्स, बैडमिंटन)।

अच्छा टॉयलेट हाइजीन एक अन्य कदम है जिससे हीमोराइड्स की रोकथाम हो सकती है। जैसे ही आपको मल का दबाव महसूस हो अपनी आँतों को खाली कर दें। यदि मलाशय की नली में अपशिष्ट बहुत लंबे समय तक रहता है, तो शरीर इससे पानी खींचने लगता है, जिसकी वजह से यह कड़ा हो सकता है और आरामदायक निकासी को अवरुद्ध कर सकता है। इसके अतिरिक्त, मलोत्सर्ग में ज़ल्दबाजी नहीं करें, इसकी वजह से आपको अत्यधिक ज़ोर लगाना पड़ सकता है। प्रत्येक मलोत्सर्ग के बाद गुदा, आदर्श रूप से एक मुलायम टॉयलेट पेपर या नम वाइप्स की सहायता से अच्छे से साफ किया जाना चाहिए।

पेल्विक फ़्लोर के नियमित व्यायाम के गर्भवती महिलाओं को हीमोराइड्स बीमारी से बचने में सहायता मिल सकती हैं। ये व्यायाम पेल्विक फ़्लोर द्वारा वहन किए जाने वाले भार को कम करते हैं और हीमोराइड्ल ऊतक पर पड़ने वाला दबाव घटाते हैं।

स्रोत:
Dr. M. Wunderlich, Vienna Centre for Intestinal Diseases; Update Hämorrhoidalleiden, Phlebologie & Proktologie 1/2015, MedMedia Verlag und Mediaservice GmbH

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Autor: Katharina Miedzinska, MSc